Chapter 9 · Verse 1
Bhagavad Gita 9.1
इदं तु ते गुह्यतमं प्रवक्ष्याम्यनसूयवे।
ज्ञानं विज्ञानसहितं यज्ज्ञात्वा मोक्ष्यसेऽशुभात्॥ १॥
idaṃ tu te guhyatamaṃ pravakṣyāmyanasūyave।
jñānaṃ vijñānasahitaṃ yajjñātvā mokṣyase'śubhāt॥ 1॥
हिन्दी
साधक-संजीवनीयह अत्यन्त गोपनीय विज्ञानसहित ज्ञान दोषदृष्टिरहित तेरे लिये तो (मैं फिर) अच्छी तरहसे कहूँगा, जिसको जानकर (तू) अशुभसे अर्थात् जन्म-मरणरूप संसारसे मुक्त हो जायगा।
English
Sadhaka-SanjivaniThe Blessed Lord said: To you who is free from the carping spirit I shall now unfold the most mysterious knowledge (Jnana), along with realization (Vijnana) by knowing which, you will be released from evil Le., the evil of worldly birth and death.
Word by wordशब्दार्थ
Source · Sadhak Sanjivaniमूल · साधक-संजीवनीSwamiji’s word meanings, in the order he reads the verse. Read them in sequence and they form the Hindi translation.स्वामीजीके अन्वयके क्रमसे शब्दार्थ — क्रमसे पढ़नेपर यही अनुवाद बनता है।
- इदम्
- यह
- गुह्यतमम्
- अत्यन्त गोपनीय
- विज्ञानसहितम्
- विज्ञानसहित
- ज्ञानम्
- ज्ञान
- अनसूयवे
- दोषदृष्टिरहित
- ते
- तेरे लिये
- तु
- तो (मैं फिर)
- प्रवक्ष्यामि
- अच्छी तरहसे कहूँगा,
- यत्
- जिसको
- ज्ञात्वा
- जानकर (तू)
- अशुभात्
- अशुभसे अर्थात् जन्म-मरणरूप संसारसे
- मोक्ष्यसे
- मुक्त हो जायगा।
A simplified explanation for this verse hasn’t been written yet. Everything here is the text of Sadhak Sanjivani itself — the full commentary is one tap away in .
From the commentaryव्याख्यासे
Source · Sadhak Sanjivaniमूल · साधक-संजीवनी‘इदं तु ते गुह्यतमं प्रवक्ष्याम्यनसूयवे’— भगवान्के मनमें जिस तत्त्वको, विषयको कहनेकी इच्छा है, उसकी तरफ लक्ष्य करानेके लिये ही यहाँ भगवान् सबसे पहले ‘इदम्’ (यह) शब्दका प्रयोग करते हैं। उस (भगवान्के मन-बुद्धिमें स्थित) तत्त्वकी महिमा कहनेके लिये ही उसको ‘गुह्यतमम्’ कहा है अर्थात् वह तत्त्व अत्यन्त गोपनीय है। इसीको आगेके श्लोकमें ‘राजगुह्यम्’ और अठारहवें अध्यायके चौंसठवें श्लोकमें ‘सर्वगुह्यतमम्’ कहा है।
यहाँ पहले ‘गुह्यतमम्’ कहकर पीछे (गीता ९। ३४ में) ‘मन्मना भव......’ कहा है और अठारहवें अध्यायमें पहले ‘सर्वगुह्यतमम्’ कहकर पीछे (गीता १८। ६५ में) ‘मन्मना भव.......’ कहा है। तात्पर्य है कि यहाँका और वहाँका विषय एक ही है, दो नहीं।
Verse 1 of 34 in chapter 9