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Indian PhilosophyOS

Chapter 12 · Verse 1

Bhagavad Gita 12.1

अर्जुन उवाच— Arjuna said

एवं सततयुक्ता ये भक्तास्त्वां पर्युपासते।

ये चाप्यक्षरमव्यक्तं तेषां के योगवित्तमा:॥ १॥

evaṃ satatayuktā ye bhaktāstvāṃ paryupāsate।

ye cāpyakṣaramavyaktaṃ teṣāṃ ke yogavittamāḥ॥ 1॥

हिन्दी

साधक-संजीवनी

जो भक्त इस प्रकार (ग्यारहवें अध्यायके पचपनवें श्लोकके अनुसार) निरन्तर आपमें लगे रहकर आप (सगुण-साकार)-की उपासना करते हैं और जो अविनाशी निर्गुण-निराकारकी ही (उपासना करते हैं), उन दोनोंमेंसे उत्तम योगवेत्ता कौन हैं?

English

Sadhaka-Sanjivani

The English edition’s translation of this verse could not be recovered reliably from the scan. Please rely on the Hindi translation and the word-by-word meanings.

Word by wordशब्दार्थ

Source · Sadhak Sanjivaniमूल · साधक-संजीवनी

Swamiji’s word meanings, in the order he reads the verse. Read them in sequence and they form the Hindi translation.स्वामीजीके अन्वयके क्रमसे शब्दार्थ — क्रमसे पढ़नेपर यही अनुवाद बनता है।

ये
जो
भक्ता:
भक्त
एवम्
इस प्रकार (ग्यारहवें अध्यायके पचपनवें श्लोकके अनुसार)
सततयुक्ता:
निरन्तर आपमें लगे रहकर
त्वाम्
आप (सगुण-साकार)-की
पर्युपासते
उपासना करते हैं
च
और
ये
जो
अक्षरम्
अविनाशी
अव्यक्तम्
निर्गुण-निराकारकी
अपि
ही (उपासना करते हैं),
तेषाम्
उन दोनोंमेंसे
योगवित्तमा:
उत्तम योगवेत्ता
के
कौन हैं?

A simplified explanation for this verse hasn’t been written yet. Everything here is the text of Sadhak Sanjivani itself — the full commentary is one tap away in .

From the commentaryव्याख्यासे

Source · Sadhak Sanjivaniमूल · साधक-संजीवनी
~6 min read · 18 paragraphs

‘एवं सततयुक्ता ये भक्ता:’—ग्यारहवें अध्यायके पचपनवें श्लोकमें भगवान्ने ‘य:’ और ‘स:’ पद जिस साधकके लिये प्रयुक्त किये हैं, उसी साधकके लिये अर्थात् सगुण-साकार भगवान्की उपासना करनेवाले सब साधकोंके लिये यहाँ ‘ये भक्ता:’ पद आये हैं।

यहाँ ‘एवम्’ पदसे ग्यारहवें अध्यायके पचपनवें श्लोकका निर्देश किया गया है।

Verse 1 of 20 in chapter 12