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Indian PhilosophyOS

Chapter 10 · Verse 6

Bhagavad Gita 10.6

महर्षय: सप्त पूर्वे चत्वारो मनवस्तथा।

मद्भावा मानसा जाता येषां लोक इमा: प्रजा:॥ ६॥

maharṣayaḥ sapta pūrve catvāro manavastathā।

madbhāvā mānasā jātā yeṣāṃ loka imāḥ prajāḥ॥ 6॥

हिन्दी

साधक-संजीवनी

सात महर्षि (और) उनसे भी पहले होनेवाले चार सनकादि तथा चौदह मनु (—ये सब-के-सब) (मेरे) मनसे पैदा हुए हैं (और) मुझमें भाव (श्रद्धा-भक्ति) रखनेवाले हैं, जिनकी संसारमें यह सम्पूर्ण प्रजा है।

English

Sadhaka-Sanjivani

The seven great seers, the more ancient four Sanaka etc., and fourteen Manus, who are all devoted to Me, are born of My will and all the creatures forming the world, have come forth from them.

Word by wordशब्दार्थ

Source · Sadhak Sanjivaniमूल · साधक-संजीवनी

Swamiji’s word meanings, in the order he reads the verse. Read them in sequence and they form the Hindi translation.स्वामीजीके अन्वयके क्रमसे शब्दार्थ — क्रमसे पढ़नेपर यही अनुवाद बनता है।

सप्त
सात
महर्षय:
महर्षि (और)
पूर्वे
उनसे भी पहले होनेवाले
चत्वार:
चार सनकादि
तथा
तथा
मनव:
चौदह मनु (—ये सब-के-सब)
मानसा:
(मेरे) मनसे
जाता:
पैदा हुए हैं (और)
मद्भावा:
मुझमें भाव (श्रद्धा-भक्ति) रखनेवाले हैं,
येषाम्
जिनकी
लोके
संसारमें
इमा:
यह
प्रजा:
सम्पूर्ण प्रजा है।

A simplified explanation for this verse hasn’t been written yet. Everything here is the text of Sadhak Sanjivani itself — the full commentary is one tap away in .

From the commentaryव्याख्यासे

Source · Sadhak Sanjivaniमूल · साधक-संजीवनी
~2 min read · 10 paragraphs

[पीछेके दो श्लोकोंमें भगवान्ने प्राणियोंके भाव-रूपसे बीस विभूतियाँ बतायीं। अब इस श्लोकमें व्यक्ति-रूपसे पचीस विभूतियाँ बता रहे हैं, जो कि प्राणियोंमें विशेष प्रभावशाली और जगत्की कारण हैं।]

‘महर्षय: सप्त’—जो दीर्घ आयुवाले; मन्त्रोंको प्रकट करनेवाले; ऐश्वर्यवान्; दिव्य दृष्टिवाले; गुण, विद्या आदिसे वृद्ध; धर्मका साक्षात् करनेवाले और गोत्रोंके प्रवर्तक हैं— ऐसे सातों गुणोंसे युक्त ऋषि सप्तर्षि कहे जाते हैं१। मरीचि, अंगिरा, अत्रि, पुलस्त्य, पुलह, क्रतु और वसिष्ठ— ये सातों ऋषि उपर्युक्त सातों ही गुणोंसे युक्त हैं। ये सातों ही वेदवेत्ता हैं, वेदोंके आचार्य माने गये हैं, प्रवृत्ति-

Verse 6 of 42 in chapter 10