Chapter 11 · Verse 1
Bhagavad Gita 11.1
मदनुग्रहाय
परमं
गुह्यमध्यात्मसञ्ज्ञितम्।
यत्त्वयोक्तं वचस्तेन मोहोऽयं विगतो मम॥ १॥
madanugrahāya
paramaṃ
guhyamadhyātmasañjñitam।
yattvayoktaṃ vacastena moho'yaṃ vigato mama॥ 1॥
हिन्दी
साधक-संजीवनीकेवल मुझपर कृपा करनेके लिये आपने जो परम गोपनीय अध्यात्म-विषयक वचन कहे, उससे मेरा यह मोह नष्ट हो गया है।
English
Sadhaka-SanjivaniBy this, profound discourse of spiritual wisdom that you have delivered, out of compassion for me, my darkness has been dispelled.
Word by wordशब्दार्थ
Source · Sadhak Sanjivaniमूल · साधक-संजीवनीSwamiji’s word meanings, in the order he reads the verse. Read them in sequence and they form the Hindi translation.स्वामीजीके अन्वयके क्रमसे शब्दार्थ — क्रमसे पढ़नेपर यही अनुवाद बनता है।
- मदनुग्रहाय
- केवल मुझपर कृपा करनेके लिये
- त्वया
- आपने
- यत्
- जो
- परमम्
- परम
- गुह्यम्
- गोपनीय
- अध्यात्म-सञ्ज्ञितम्
- अध्यात्म-विषयक
- वच:
- वचन
- उक्तम्
- कहे,
- तेन
- उससे
- मम
- मेरा
- अयम्
- यह
- मोह:
- मोह
- विगत:
- नष्ट हो गया है।
A simplified explanation for this verse hasn’t been written yet. Everything here is the text of Sadhak Sanjivani itself — the full commentary is one tap away in .
From the commentaryव्याख्यासे
Source · Sadhak Sanjivaniमूल · साधक-संजीवनी[भगवान्की कृपाका अनुभव करके अर्जुन भावविभोर हो उठे और कृपाका रहस्य प्रकट करनेके लिये जब अत्यधिक प्रसन्नतासे बोले, तब नियमका खयाल न रहनेसे यह श्लोक तैंतीस अक्षरोंका आया है, जब कि गीताभरमें अनुष्टुप् छन्दवाले श्लोक बत्तीस अक्षरोंके ही आये हैं। तात्पर्य है कि अत्यधिक प्रसन्नता होनेपर नियमका ध्यान नहीं रहता। ]
‘मदनुग्रहाय’—मेरा भजन करनेवालोंपर कृपा करके मैं स्वयं उनके अज्ञानजन्य अन्धकारका नाश कर देता हूँ (गीता—दसवें अध्यायका ग्यारहवाँ श्लोक)—यह बात भगवान्ने केवल कृपा-परवश होकर कही। इस बातका अर्जुनपर बड़ा प्रभाव पड़ा, जिससे अर्जुन भगवान्की स्तुति करने लगे (दसवें अध्यायके बारहवेंसे पन्द्रहवें श्लोकतक)। ऐसी स्तुति उन्होंने पहले गीतामें कहीं नहीं की। उसीका लक्ष्य करके अर्जुन यहाँ कहते हैं कि केवल मेरेपर कृपा करनेके लिये ही आपने ऐसी बात कही है*।
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