Skip to content
Indian PhilosophyOS

Chapter 7 · Verse 10

Bhagavad Gita 7.10

बीजं मां सर्वभूतानां विद्धि पार्थ सनातनम्।

बुद्धिर्बुद्धिमतामस्मि तेजस्तेजस्विनामहम्॥ १०॥

bījaṃ māṃ sarvabhūtānāṃ viddhi pārtha sanātanam।

buddhirbuddhimatāmasmi tejastejasvināmaham॥ 10॥

हिन्दी

साधक-संजीवनी

हे पृथानन्दन! सम्पूर्ण प्राणियोंका अनादि बीज मुझे जान। बुद्धिमानोंमें बुद्धि (और) तेजस्वियोंमें तेज मैं हूँ।

English

Sadhaka-Sanjivani

O Partha, know Me as the eternal, (Sanatana) seed of all beings; I am the intelligence of the intelligent, the glory (splendour), of the glorious.

Word by wordशब्दार्थ

Source · Sadhak Sanjivaniमूल · साधक-संजीवनी

Swamiji’s word meanings, in the order he reads the verse. Read them in sequence and they form the Hindi translation.स्वामीजीके अन्वयके क्रमसे शब्दार्थ — क्रमसे पढ़नेपर यही अनुवाद बनता है।

पार्थ
हे पृथानन्दन!
सर्वभूतानाम्
सम्पूर्ण प्राणियोंका
सनातनम्
अनादि
बीजम्
बीज
माम्
मुझे
विद्धि
जान।
बुद्धिमताम्
बुद्धिमानोंमें
बुद्धि:
बुद्धि (और)
तेजस्विनाम्
तेजस्वियोंमें
तेज:
तेज
अहम्
मैं
अस्मि
हूँ।

A simplified explanation for this verse hasn’t been written yet. Everything here is the text of Sadhak Sanjivani itself — the full commentary is one tap away in .

From the commentaryव्याख्यासे

Source · Sadhak Sanjivaniमूल · साधक-संजीवनी
~6 min read · 8 paragraphs

**‘बीजं मां सर्वभूतानां विद्धि*पार्थसनातनम्’—**हे पार्थ! सम्पूर्ण प्राणियोंका सनातन (अविनाशी) बीज मैं हूँ अर्थात् सबका कारण मैं ही हूँ। सम्पूर्ण प्राणी बीजरूप मेरेसे उत्पन्न होते हैं, मेरेमें ही रहते हैं और अन्तमें मेरेमें ही लीन होते हैं। मेरे बिना प्राणीकी स्वतन्त्र सत्ता नहीं है।

जितने बीज होते हैं, वे सब वृक्षसे उत्पन्न होते हैं और वृक्ष पैदा करके नष्ट हो जाते हैं। परन्तु यहाँ जिस बीजका वर्णन है, वह बीज ‘सनातन’ है अर्थात् आदि-अन्तसे रहित (अनादि एवं अनन्त) है। इसीको नवें अध्यायके अठारहवें श्लोकमें ‘अव्यय बीज’ कहा गया है। यह चेतन-तत्त्व अव्यय अर्थात् अविनाशी है। यह स्वयं विकाररहित रहते हुए ही सम्पूर्ण जगत्का उत्पादक, आश्रय और प्रकाशक है तथा जगत्का कारण है।

Verse 10 of 30 in chapter 7