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Indian PhilosophyOS

Chapter 14 · Verse 1

Bhagavad Gita 14.1

परं भूय: प्रवक्ष्यामि ज्ञानानां ज्ञानमुत्तमम्।

यज्ज्ञात्वा मुनय: सर्वे परां सिद्धिमितो गता:॥ १॥

paraṃ bhūyaḥ pravakṣyāmi jñānānāṃ jñānamuttamam।

yajjñātvā munayaḥ sarve parāṃ siddhimito gatāḥ॥ 1॥

हिन्दी

साधक-संजीवनी

सम्पूर्ण ज्ञानोंमें उत्तम (और) श्रेष्ठ ज्ञानको (मैं) फिर कहूँगा, जिसको जानकर सब-के-सब मुनिलोग इस संसारसे (मुक्त होकर) परम सिद्धिको प्राप्त हो गये हैं।

English

Sadhaka-Sanjivani

The Blessed Lord said: I shall once again explain to you that supreme wisdom (JiHina), the best of all wisdoms by knowing which, all sages have attained the highest perfection, and were liberated, from this mundane existence.

Word by wordशब्दार्थ

Source · Sadhak Sanjivaniमूल · साधक-संजीवनी

Swamiji’s word meanings, in the order he reads the verse. Read them in sequence and they form the Hindi translation.स्वामीजीके अन्वयके क्रमसे शब्दार्थ — क्रमसे पढ़नेपर यही अनुवाद बनता है।

ज्ञानानाम्
सम्पूर्ण ज्ञानोंमें
उत्तमम्
उत्तम (और)
परम्
श्रेष्ठ
ज्ञानम्
ज्ञानको (मैं)
भूय:
फिर
प्रवक्ष्यामि
कहूँगा,
यत्
जिसको
ज्ञात्वा
जानकर
सर्वे
सब-के-सब
मुनय:
मुनिलोग
इत:
इस संसारसे (मुक्त होकर)
पराम्
परम
सिद्धिम्
सिद्धिको
गता:
प्राप्त हो गये हैं।

A simplified explanation for this verse hasn’t been written yet. Everything here is the text of Sadhak Sanjivani itself — the full commentary is one tap away in .

From the commentaryव्याख्यासे

Source · Sadhak Sanjivaniमूल · साधक-संजीवनी
~2 min read · 6 paragraphs

‘परं भूय: प्रवक्ष्यामि ज्ञानानां ज्ञान-मुत्तमम्’—तेरहवें अध्यायके अठारहवें, तेईसवें और चौंतीसवें श्लोकमें भगवान्ने क्षेत्र-क्षेत्रज्ञका, प्रकृति-पुरुषका जो ज्ञान (विवेक) बताया था, उसी ज्ञानको फिर बतानेके लिये भगवान् ‘भूय: प्रवक्ष्यामि’ पदोंसे प्रतिज्ञा करते हैं।

लौकिक और पारलौकिक जितने भी ज्ञान हैं अर्थात् जितनी भी विद्याओं, कलाओं, भाषाओं, लिपियों आदिका ज्ञान है, उन सबसे प्रकृति-पुरुषका भेद बतानेवाला, प्रकृतिसे अतीत करनेवाला, परमात्माकी प्राप्ति करानेवाला यह ज्ञान श्रेष्ठ है, सर्वोत्कृष्ट है। इसके समान दूसरा कोई ज्ञान है ही नहीं, हो सकता ही नहीं और होना सम्भव भी नहीं। कारण कि दूसरे सभी ज्ञान संसारमें फँसानेवाले हैं, बन्धनमें डालनेवाले हैं।

Verse 1 of 27 in chapter 14